डीएनबी डिग्रीधारी चिकित्सकों के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने को लेकर नियम आसान

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) भारतीय चिकित्सा परिषद के नवगठित निदेशक मंडल ने डीएनबी (डेप्लोमेट आफ नेशनल बोर्ड) डिग्रीधारक चिकित्सकों के एम्स, राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेज और स्नाकतोत्तर शिक्षण संस्थानों (पीजीआई) में पढ़ाने के नियमों को आसान बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नीति आयोग के सदस्य वी. के. पॉल ने रविवार को यह जानकारी दी। डीएनबी डाक्टर ऐसे निजी अस्पतालों में प्रशिक्षित होते हैं जिसके अपने खुद के मेडिकल कॉलेज नहीं हैं। यह स्नाकोत्तर डिग्री के समतुल्य होती है जिसे राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड प्रदान करता है। पॉल चिकित्सा परिषद के नवगठित निदेशक मंडल के चेयरपर्सन भी हैं। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा कि नए नियमों से संबंधित अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी जिसके बाद यह नियम प्रभावी हो जाएंगे। नए प्रस्तावित नियमों के मुताबिक ऐसे डीएनबी डिग्रीधारी चिकित्सक जो 100 बिस्तर वाले स्पेशियलिटी या सुपर स्पेशियलिटी निजी अस्पतालों में काम कर रहे हैं, उन्हें परिषद से मान्यता प्राप्त किसी भी संस्थान में अतिरिक्त एक साल वरिष्ठ रेजीडेंट के तौर पर काम करना होगा। इसके पूरा होने के बाद वे चिकित्सा शिक्षक के तौर पर काम करने के योग्य होंगे। अभी तक उन्हें मास्टर ऑफ मेडिसन (एमडी) और मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) डिग्रीधारी चिकित्सकों के बराबर नहीं माना जाता है। एमडी और एमएस डिग्रीधारक चिकित्सकों को शिक्षक के तौर पर मेडिकल कॉलेजों में वरीयता दी जाती है। चिकित्सा परिषद ने अब इस कड़े प्रावधान को थोड़ा आसान बनाया है।

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